Amit Shah said in Lok Sabha

नक्सलवाद पर सख्त संदेश: लोकसभा में अमित शाह बोले – “गोली का जवाब गोली से मिलेगा”, देश तेजी से हो रहा मुक्त

शीर्षक: नक्सलवाद पर सख्त संदेश: लोकसभा में अमित शाह बोले – “गोली का जवाब गोली से मिलेगा”, देश तेजी से हो रहा मुक्त

नई दिल्ली: देश में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बड़ा और सख्त बयान दिया। लोकसभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब तेजी से नक्सलवाद से मुक्त हो रहा है और सरकार की नीति स्पष्ट है—“गोली का जवाब गोली से मिलेगा।” उनके इस बयान को सरकार की कड़ी सुरक्षा नीति और आंतरिक सुरक्षा पर दृढ़ रुख के रूप में देखा जा रहा है।

गृह मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि सरकार ने न केवल सुरक्षा के स्तर पर बल्कि विकास के माध्यम से भी नक्सलवाद की जड़ों को खत्म करने की दिशा में काम किया है।

नक्सलवाद पर कड़ा रुख

अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो लोग हथियार उठाकर देश की शांति और विकास को बाधित करने का प्रयास करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी हालत में हिंसा को बर्दाश्त नहीं करेगी। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में नक्सल गतिविधियों में गिरावट दर्ज की गई है।

उन्होंने कहा, “हमने नक्सलवाद को सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं माना, बल्कि इसे विकास से भी जोड़ा। जहां सड़कें, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पहुंचा, वहां नक्सलवाद खुद कमजोर पड़ा।”

विकास और सुरक्षा का डबल इंजन

गृह मंत्री ने बताया कि सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया है। दूरदराज के गांवों तक सड़क, बिजली और इंटरनेट पहुंचाने के प्रयास किए गए हैं। इसके अलावा, युवाओं को रोजगार के अवसर देने के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि पहले जिन इलाकों में प्रशासन की पहुंच नहीं थी, वहां अब सरकारी योजनाएं सफलतापूर्वक लागू हो रही हैं। इससे स्थानीय लोगों का विश्वास सरकार के प्रति बढ़ा है और नक्सली संगठनों की पकड़ कमजोर हुई है।

सुरक्षा बलों की भूमिका

अमित शाह ने सुरक्षा बलों की सराहना करते हुए कहा कि उनके साहस और समर्पण के कारण ही नक्सलवाद पर नियंत्रण संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि जवानों ने कठिन परिस्थितियों में भी देश की सुरक्षा के लिए अपना सर्वोच्च योगदान दिया है।

उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक तकनीक, बेहतर खुफिया तंत्र और समन्वित कार्रवाई के जरिए नक्सलियों के खिलाफ अभियान को और मजबूत किया गया है। सरकार ने सुरक्षा बलों को आधुनिक हथियार और संसाधन उपलब्ध कराए हैं, जिससे उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि हुई है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव

गृह मंत्री के अनुसार, जिन जिलों को पहले ‘रेड कॉरिडोर’ कहा जाता था, वहां अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है और स्थानीय लोग अब मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कई नक्सली संगठन अब कमजोर पड़ चुके हैं और बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए भी योजनाएं बनाई हैं, जिससे वे सामान्य जीवन जी सकें।

विपक्ष पर निशाना

अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल नक्सलवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर भी राजनीति करते हैं, जो देशहित में नहीं है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर एकजुट होकर काम करें।

सरकार की भविष्य की रणनीति

गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य नक्सलवाद का पूर्ण उन्मूलन है। इसके लिए सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर काम जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा और देश के सभी हिस्सों में शांति और विकास सुनिश्चित होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार नई रणनीतियों और तकनीकों के जरिए इस लड़ाई को और प्रभावी बनाएगी। स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और जनता के सहयोग से नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को अंतिम चरण तक पहुंचाया जाएगा।

निष्कर्ष

अमित शाह का लोकसभा में दिया गया बयान यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार नक्सलवाद के खिलाफ पूरी तरह प्रतिबद्ध है। “गोली का जवाब गोली से मिलेगा” जैसी सख्त चेतावनी यह संकेत देती है कि सरकार अब इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार की नरमी बरतने के मूड में नहीं है।

देश में तेजी से बदलते हालात और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हो रहे विकास को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि भारत नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, इस लक्ष्य को पूरी तरह हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास और सतर्कता की आवश्यकता बनी रहेगी।

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